सत्रहवीं शताब्दी में इटली के फ्लोरेंस शहर में आर्तेमीसिया जेंटिलेशी नामक एक महिला चित्रकार हुई.
यह सम्पूर्ण विश्व में आज तक हुई अपने आप में अकेली अनोखी चित्रकार है.
इस महिला चित्रकार ने कुल 27 चित्र बनाये. सभी अपने आप में अनोखे.
इन चित्रों में एक औरत पुरुष को बड़े ही हिंसात्मक तरीके से मारती पीटती चित्रित की गई है. पुरुष के बाल नोचना, डंडे से पीटना, छुरा घोंपना और सर में मोटी मोटी कील ठोकने जैसे दृश्य चित्रित किये गये हैं.
जिस भी हिंसात्मक तरीके से पुरुष को पीटा और अपमानित किया जा सकता है वो सब उसने चित्रित किया.
कहते हैं की उसके पिता के एक अधेड़ दोस्त ने उसका कम उम्र में ही बलात्कार कर दिया था. बलात्कार की अमानवीय पीड़ा और उसके बाद चले मुकद्दमे की बहसबाजी ने उसे तोड़ दिया. उसके मन में पुरुषों के प्रति असीम घृणा भर गई.
आर्तेमीसिया के चित्रों में पुरुषों के चेहरे तो भिन्न भिन्न हैं लेकिन उन्हें पीटती स्त्री का चेहरा एक ही है जो की उसकी स्वयं की शक्ल से मिलता जुलता है...
यह सम्पूर्ण विश्व में आज तक हुई अपने आप में अकेली अनोखी चित्रकार है.
इस महिला चित्रकार ने कुल 27 चित्र बनाये. सभी अपने आप में अनोखे.
इन चित्रों में एक औरत पुरुष को बड़े ही हिंसात्मक तरीके से मारती पीटती चित्रित की गई है. पुरुष के बाल नोचना, डंडे से पीटना, छुरा घोंपना और सर में मोटी मोटी कील ठोकने जैसे दृश्य चित्रित किये गये हैं.
जिस भी हिंसात्मक तरीके से पुरुष को पीटा और अपमानित किया जा सकता है वो सब उसने चित्रित किया.
कहते हैं की उसके पिता के एक अधेड़ दोस्त ने उसका कम उम्र में ही बलात्कार कर दिया था. बलात्कार की अमानवीय पीड़ा और उसके बाद चले मुकद्दमे की बहसबाजी ने उसे तोड़ दिया. उसके मन में पुरुषों के प्रति असीम घृणा भर गई.
आर्तेमीसिया के चित्रों में पुरुषों के चेहरे तो भिन्न भिन्न हैं लेकिन उन्हें पीटती स्त्री का चेहरा एक ही है जो की उसकी स्वयं की शक्ल से मिलता जुलता है...

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें