अंतरजाल
मेरी कविताएं, कहानियां, संवाद और लेख...
रविवार, 19 जून 2016
पिता
रिश्तों के
अनेक
तल हैं
कुछ पाताल
तो कुछ महातल हैं
पिता जैसा
कोई तल नही
वे
एक साथ
सुतल
वितल
अतल
सब हैं...
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