शुक्रवार, 10 जून 2016

पढ़ाई

चौधरी रामेश्वर सिंह की पुत्री का विवाह है.
मशहूर हलवाई गणपत घर आया हुआ है. दावत के सामान की लिस्ट बन रही है. सात सौ के लगभग कुल मेहमान रहेंगे. तीन सौ बाराती और चार सौ घराती. चौधरी साहब की ताकीद है खाना बढ़िया बनना चाहिये.
चौधरी साहब मध्यमवर्गीय आदमी हैं. बहुत अमीर नहीं तो गरीब भी नहीं. आमदनी का मुख्य स्रोत किराया है. दस बारह दड़बे नुमा कमरे और दो छोटे फैक्ट्री शेड के किराये से जिंदगी मजे में गुजर रही है.
गणपत ने सामान की छपी छपाई लिस्ट में मात्रा लिखी और सादे कागज पर बनी एक दूसरी लिस्ट के साथ चौधरी साहब को पकड़ा दी.
एक लिस्ट में किराने के सामान और दूसरी में फल सब्जी दूध दही ईंधन आदि का ब्यौरा है.
गणपत को किराने का सामान और ईंधन आज ही चाहिए. कल सुबह वह अपनी टीम के साथ काम शुरू कर देगा. विवाह परसों है पर मिठाईयां कल सुबह से ही बननी आरंभ हो जायेंगी.
जाते जाते गणपत चौधरी साहब को ध्यान दिलाता गया की उसे चीनी मवाने की बेसन राजधानी का और घी पनघट ही चाहिये.
हालांकि लिस्ट में लिखा है फिर भी उसने याद दिलाना बेहतर समझा. साथ ही कहता गया की दो चार जगह भाव पूछकर ही सामान लेना. ज़माना बड़ा खराब है.
चौधरी साहब लिस्ट और नोटों की गड्डी जेब में ठूंस शहर के मुख्य बाजार की ओर रवाना हुए.
इतनी बड़ी खरीदारी का उन्हें पहले कोई अनुभव ना था. होशियारी से खरीदारी करना चाहते थे. सच में जमाना बड़ा खराब है. ना जाने कौन कब कहां ठग ले.
शहर के मुख्य बाज़ार पहुंच किराने की दुकानों को तकते घूमने लगे.
एक दुकान पर रुक मवाना की चीनी का भाव लिया. दुकानदार ने 3000 रूपए की बोरी बताई.
वहां से चल अगली दुकान पर पहुंचे. मवाना की चीनी 3050 और राजधानी बेसन 2400 रूपए कट्टे का भाव मिला.
सोचने लगे बड़ा दुष्ट है चीनी महंगी बता रहा है. तीसरी दुकान पर पहुंचे. मवाना की चीनी 3000 राजधानी बेसन 2450 और पनघट घी का टीन 1350 रूपए.
ये वाला भी कुछ जमा नहीं. बिना बात बेसन में 50 रूपए ज्यादा घुसेड़ दिये.
सच में सही सौदा लेना बड़ा ही मुश्किल काम है.
धूप चढ़ आई थी और सामान काफी लेना था. घर पर भी हजारों काम थे. चौधरी साहब एक अन्य दुकान पर पहुंचे.
यह दुकान लाला मगनलाल की थी. लाला जी ने मुस्कुरा कर चौधरी साहब का स्वागत किया. साथ में उनका पुत्र गोपी बैठा था. बारहवीं करा लाला जी ने उसे पिछले हफ्ते से ही दुकान पर अपने साथ बिठाना शुरू किया था.
चौधरी साहब ने मवाना की चीनी का भाव पूछा. लाला जी ने बड़े ही विनयशील स्वर में 2900 रूपए का भाव बताया. राजधानी बेसन 2350 और पनघट घी 1300 रूपए बताया.
गोपी ने अचरज से पिता की ओर देखा.
चौधरी साहब ने चैन की सांस ली. थोड़ा घूमना तो पड़ा मगर पहुंच गये सही जगह. उन्होंने किराने वाली लिस्ट लाला जी को पकड़ा दी और एक कुर्सी पर खुद को ढीला छोड़ दिया.
लाला जी ने पूछा घर में शादी है. हां बिटिया की शादी है. इशारा पाते ही नौकर भाग कर चौधरी साहब के लिये लस्सी ले आया.
गोपी लिस्ट पढ़ कर का सामान निकलवाने लगा. मेवे , मसाले , दालें , चावल , देसी घी , केसर , मैदा और भी ना जाने क्या क्या. बहुत बड़ी लिस्ट थी.
सब सामान निकल गया तो लाला जी ने थ्रीव्हीलर बुलवा दिया. चौधरी साहब ने भुगतान किया और सामान लेकर चले गये.
ग्राहक के जाने के बाद नौकर को इधर उधर कर गोपी ने पिता से पूछा पापा आपने चीनी बेसन और पनघट के भाव कम क्यों बताये.
चीनी तो आपने खरीद से भी कम में बेच दी.
लाला जी मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले मवाना की चीनी सुनते ही मैं समझ गया की यह शादी की खरीदारी है.
चीनी बेसन पनघट के भाव तो चूहेदानी हैं बेटा.
असली राज तो बाकी लिस्ट में छिपा है. जरा अपनी वाली रेट लिस्ट तो चेक कर.
गोपी ने लिस्ट देखी तो सब जमा घटा समझ में आ गया.
आज उसे दुकान पर बैठने में पहली बार मजा आ रहा था...

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