मुक्ति
श्वेत शुभ्र निर्मल परकाशझरता रहता मन आकाशअंतस में पूरण अवकाश
छूट गए सब बंधन पाश
सहज सरल जीवन परकार
भस्म हुए सभी पंच विकार
ह्रदयकुंज उत्सव साकार
मृण्मय चिन्मय एकाकार
स्नेहसिक्त मधुमय परभाव
कृपा रूप अति कोमल भाव
दृष्टि करती नष्ट अभाव
निश्छल निश्चित प्रेम स्वभाव...
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