गुरुग्राम के कार्टरपुरी इलाके में एक गौशाला है 'कामधेनु धाम'.
विशाल भूभाग में फैली इस गौशाला में लगभग 2500 गाय हैं. जितनी सुन्दर व्यवस्था और स्वच्छता इस गौशाला में देखने को मिलती है वह अन्यत्र दुर्लभ है.
गुरुग्राम नगर निगम और विष्णु ट्रस्ट नामक एक NGO इस गौशाला को चलाते हैं.
गौशाला में गायों के लिए एक अस्पताल जो आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है के अलावा श्रीकृष्ण और शिव मंदिर, एक पुस्तकालय और हर्बल उत्पादों की एक दुकान भी है.
विशाल भूभाग में फैली इस गौशाला में लगभग 2500 गाय हैं. जितनी सुन्दर व्यवस्था और स्वच्छता इस गौशाला में देखने को मिलती है वह अन्यत्र दुर्लभ है.
गुरुग्राम नगर निगम और विष्णु ट्रस्ट नामक एक NGO इस गौशाला को चलाते हैं.
गौशाला में गायों के लिए एक अस्पताल जो आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है के अलावा श्रीकृष्ण और शिव मंदिर, एक पुस्तकालय और हर्बल उत्पादों की एक दुकान भी है.
गौशाला के प्रबंधक ब्रिगेडियर चौहान इस गौशाला के बारे में जो बताते हैं वह चौंका देने वाला है.
वह इस गौशाला को महातीर्थ की संज्ञा देते हैं बातचीत के दौरान उन्होंने गायों से सम्बंधित अपने जो अनुभव बताये वह रोमांचित कर देते हैं.
वह इस गौशाला को महातीर्थ की संज्ञा देते हैं बातचीत के दौरान उन्होंने गायों से सम्बंधित अपने जो अनुभव बताये वह रोमांचित कर देते हैं.
ब्रिगेडियर चौहान के अनुसार गायों में प्राकृतिक रूप से टेलीपैथी सम्प्रेषण की क्षमता होती है और इसका उन्हें अनेक बार अनुभव हुआ है. गायों ने उन्हें स्वप्न में भी अपनी पीड़ा और समस्याओं के बारे में बताया है जो जांचने पर सत्य सिद्ध हुआ.
एक बार सर्दियों के दिनों में एक गाय कर्मचारी की लापरवाही से बाहर खुले में ही रह गई कर्मचारी उसे शेड में लाना भूल गया. रात सोते समय ब्रिगेडियर साहब को स्वप्न आया जिसमे गाय कह रही थी मुझे खुले में ही छोड़ दिया गया है और मुझे ठण्ड लग रही है. स्वप्न टूटने पर उन्होंने जांच करवाई तो एक गाय भूलवश बाहर खुले में ही रह गई थी जिसे ढूंढकर शेड में लाया गया.
ऐसे ही एक बार शेड नंबर 4 की एक गाय ने स्वप्न में उन्हें अपने कूल्हे की चोट के बारे में बताया और शिकायत की कि उसके साथ लापरवाही हो रही है. जांच करने पर यह बात भी सत्य निकली.
एक अन्य घटना में एक गाय ने उन्हें स्वप्न में बताया की मैं एक बछिया को जन्म देने जा रही हूं पर मेरी तरफ किसी का ध्यान ही नहीं है. अगली सुबह ब्रिगेडियर साहब ने उस गाय को तत्काल जन्मी बछिया को चाटते पाया.
ब्रिगेडियर साहब ने एक बार स्वप्न देखा की शेड नंबर 2 में गायें नृत्य कर रही हैं.
जागने पर उन्हें यह स्वप्न बहुत अजीब लगा. जब वह सुबह गौशाला पहुंचे तो शेड नंबर 2 के आस पास ही मंडराने लगे. जब शेड की सफाई हो रही थी अधिकांश गायें बाहर खुले मैदान में थीं और कुछ ही गायें शेड में मौजूद थीं. अचानक शेड में मौजूद गायों ने विचित्र हाव भाव के साथ ताल मिलाकर नृत्य जैसा कुछ करना शुरू कर दिया जो की लगभग एक मिनट तक चला. ब्रिगेडियर चौहान आज तक समझ नहीं पाए हैं की उस नृत्य का क्या अर्थ था और गायें उसके जरिये क्या अभिव्यक्त करना चाह रहीं थीं.
एक बार सर्दियों के दिनों में एक गाय कर्मचारी की लापरवाही से बाहर खुले में ही रह गई कर्मचारी उसे शेड में लाना भूल गया. रात सोते समय ब्रिगेडियर साहब को स्वप्न आया जिसमे गाय कह रही थी मुझे खुले में ही छोड़ दिया गया है और मुझे ठण्ड लग रही है. स्वप्न टूटने पर उन्होंने जांच करवाई तो एक गाय भूलवश बाहर खुले में ही रह गई थी जिसे ढूंढकर शेड में लाया गया.
ऐसे ही एक बार शेड नंबर 4 की एक गाय ने स्वप्न में उन्हें अपने कूल्हे की चोट के बारे में बताया और शिकायत की कि उसके साथ लापरवाही हो रही है. जांच करने पर यह बात भी सत्य निकली.
एक अन्य घटना में एक गाय ने उन्हें स्वप्न में बताया की मैं एक बछिया को जन्म देने जा रही हूं पर मेरी तरफ किसी का ध्यान ही नहीं है. अगली सुबह ब्रिगेडियर साहब ने उस गाय को तत्काल जन्मी बछिया को चाटते पाया.
ब्रिगेडियर साहब ने एक बार स्वप्न देखा की शेड नंबर 2 में गायें नृत्य कर रही हैं.
जागने पर उन्हें यह स्वप्न बहुत अजीब लगा. जब वह सुबह गौशाला पहुंचे तो शेड नंबर 2 के आस पास ही मंडराने लगे. जब शेड की सफाई हो रही थी अधिकांश गायें बाहर खुले मैदान में थीं और कुछ ही गायें शेड में मौजूद थीं. अचानक शेड में मौजूद गायों ने विचित्र हाव भाव के साथ ताल मिलाकर नृत्य जैसा कुछ करना शुरू कर दिया जो की लगभग एक मिनट तक चला. ब्रिगेडियर चौहान आज तक समझ नहीं पाए हैं की उस नृत्य का क्या अर्थ था और गायें उसके जरिये क्या अभिव्यक्त करना चाह रहीं थीं.
ऐसे ही एक से बढ़कर एक अनुभवों की ब्रिगेडियर साहब के पास भरमार है. उनका कहना है गायों के समक्ष प्रार्थना करने से अनेक लोगों के दुःसाध्य रोग ठीक हुए हैं और मनोकामनाएं पूर्ण हुई हैं.
इसी कड़ी में वह गौशाला की एक ऐसी गाय से मिलवाते हैं जो साधारण गायों से बिल्कुल अलग दिखती है.
इस गाय का रंग सफ़ेद सुनहला और सींग, नेत्र, होठ गुलाबी हैं. ब्रिगेडियर साहब के अनुसार यह कामधेनु गाय है और उसी श्रेणी की गाय है जो समुद्र मंथन में सागर से निकली थी.
यह गाय सात वर्ष पूर्व सड़क पर लावारिस भटकती मिली थी. ब्रिगेडियर चौहान के अनुसार यह दुर्लभ गाय है और अन्य किसी भी गौशाला में नहीं है. इस गाय को सभी मां का सम्बोधन देते हैं. सैंकड़ों गायों के बीच मां पुकारने पर केवल यही गाय सिर उठाकर आपकी तरफ देखती है.
इस गाय का रंग सफ़ेद सुनहला और सींग, नेत्र, होठ गुलाबी हैं. ब्रिगेडियर साहब के अनुसार यह कामधेनु गाय है और उसी श्रेणी की गाय है जो समुद्र मंथन में सागर से निकली थी.
यह गाय सात वर्ष पूर्व सड़क पर लावारिस भटकती मिली थी. ब्रिगेडियर चौहान के अनुसार यह दुर्लभ गाय है और अन्य किसी भी गौशाला में नहीं है. इस गाय को सभी मां का सम्बोधन देते हैं. सैंकड़ों गायों के बीच मां पुकारने पर केवल यही गाय सिर उठाकर आपकी तरफ देखती है.
गौशाला में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है यह चमत्कारिक और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली गाय है.
इस गाय में कुछ विशेषता तो है क्योंकि अन्य गायों की तरह यह खाद्य पदार्थों की तरफ नहीं लपकती. आप कितने भी सुस्वादु व्यंजन ले जाईये लेकिन इसे खिलाना सरल नहीं है. बहुत मनुहार करने और मां मां की गुहार लगाने पर यह आपके द्वारा लाये खाद्यान्न को थोड़ा सा चखती भर है और कई बार तो वह भी नहीं.
कुछ लोगों को तो बरसों कोशिश करते हो गए पर कामधेनु मां ने उनके हाथ से भोजन स्वीकार नहीं किया है.
इस गाय की चाल ढ़ाल और स्वभाव में एक अजब सी गरिमा है. इसकी देहयष्टि भी अन्य गायों से बिल्कुल भिन्न है. इसे देखने पर लगता है जैसे यह हर चीज से निर्लिप्त हो.
इस गाय में कुछ विशेषता तो है क्योंकि अन्य गायों की तरह यह खाद्य पदार्थों की तरफ नहीं लपकती. आप कितने भी सुस्वादु व्यंजन ले जाईये लेकिन इसे खिलाना सरल नहीं है. बहुत मनुहार करने और मां मां की गुहार लगाने पर यह आपके द्वारा लाये खाद्यान्न को थोड़ा सा चखती भर है और कई बार तो वह भी नहीं.
कुछ लोगों को तो बरसों कोशिश करते हो गए पर कामधेनु मां ने उनके हाथ से भोजन स्वीकार नहीं किया है.
इस गाय की चाल ढ़ाल और स्वभाव में एक अजब सी गरिमा है. इसकी देहयष्टि भी अन्य गायों से बिल्कुल भिन्न है. इसे देखने पर लगता है जैसे यह हर चीज से निर्लिप्त हो.
हिन्दुओं का कोई त्यौहार हो अथवा पूर्णमासी या अमावस्या का दिन इस गौशाला में मेला सा लग जाता है.
लोग सपरिवार यहां आते हैं और गायों को अपने हाथों से फल, मिठाई, गुड़, रोटी, दलिया आदि खिलाते हैं. इसके अलावा रोजमर्रा में भी गौभक्तों का यहां आना लगा ही रहता है.
यहां आकर और कुछ समय बिताकर ब्रिगेडियर चौहान के इस कथन पर विश्वास हो जाता है की यह महातीर्थ है...
लोग सपरिवार यहां आते हैं और गायों को अपने हाथों से फल, मिठाई, गुड़, रोटी, दलिया आदि खिलाते हैं. इसके अलावा रोजमर्रा में भी गौभक्तों का यहां आना लगा ही रहता है.
यहां आकर और कुछ समय बिताकर ब्रिगेडियर चौहान के इस कथन पर विश्वास हो जाता है की यह महातीर्थ है...


