आजकल 'आकर्षण के नियम Law Of Attraction' की चर्चा जोरों पर है. इससे सम्बंधित पुस्तकों, वीडियो और वर्कशॉप्स की मानो बाढ़ सी आई हुई है. मानवीय लालच और लालसा को लुभाता इसका बड़ा भारी बाजार खड़ा हो गया है.
इस नियम को एक ऐसी कुंजी बताया जा रहा है जिसके द्वारा कुछ भी असंभव नहीं. इसके प्रयोग से धन दौलत, रुतबा, प्रेम और शांति सब आपके चरणों में लोटने लगेंगे.
यह नियम अहसासों पर आधारित है.
जैसे भाव होंगे वैसा ही फल मिलेगा. विशेषज्ञों द्वारा इसे तीन चरणों में बांटा गया है. पहले में इच्छित वस्तु की कामना यानि उसका लक्ष्य निर्धारण या फिर कहें की उसकी मानसिक कल्पना. दूसरे चरण में भाव करना की वह वस्तु या लक्ष्य आपको प्राप्त हो गया है और तीसरे में अस्तित्व को धन्यवाद देना, अहोभावपूर्ण होना.
तकनीकी रूप से इस नियम की प्रयोग विधि में कोई कमी दिखाई नहीं देती. यह बेहद सरल प्रतीत होता है. फिर क्या कारण हैं की इसके अभ्यासी को समुचित फल प्राप्त नहीं होता, और शायद कभी होगा भी नहीं.
क्योंकि प्रत्येक का अपना प्रारब्द्ध है.
आकर्षण का नियम अपना कार्य करता है लेकिन इसका फैलाव इतना अधिक है की यह व्यक्ति के वर्तमान जीवन का अतिक्रमण कर जाता है. सनातन मान्यता जन्म जन्मांतर में विश्वास करती है. पूर्वजन्म इस मान्यता में एक सर्वमान्य सत्य है. साथ ही यह भी कहा जाता है की प्रत्येक वर्तमान जन्म अतीत के जन्म का ही प्रतिफल है. अनंत जन्मों से गुजरती हुई यह आत्मा की वह विकास यात्रा है जिसमे उसे अंतत: परमात्मा में लीन होना है.
व्यक्ति सामाजिक मानदंडों पर सुख दुःख और सफलता असफलता की परिभाषा तय करता है. जबकि अंतरात्मा जिसे अवचेतन मन भी कहा गया है इन सबकी कुछ और ही परिभाषा लिये होती है.
सनातन दर्शन कहता है की जीव का प्रत्येक जन्म उसका स्वयं का चुनाव है. स्वयं के विकास के लिए वह अमीर, गरीब, राजा, रंक, अपाहिज, सक्षम, अक्षम, स्त्री, पुरुष किसी भी रूप में जन्म लेता है. परमात्मा से मिलन की अपनी अनेक जन्मों की यात्रा में लिया गया प्रत्येक जन्म उसकी स्वयं की ही इच्छा है भले ही वह कितना भी दुखद और यंत्रणापूर्ण क्यों ना हो.
इस प्रकार विभिन्न अनुभवों से जीवात्मा स्वयं को परिपक्व करती हुई एक दिन निर्विकार हो मोक्ष को प्राप्त हो जाती है. और इस सम्पूर्ण यात्रा में अस्तित्व उसकी चाह के साथ सहयोग करता है.
अब यह आकर्षण का नियम ही है जो की जीवात्मा की जीवन यात्रा में उसके साथ चलता है.
जब वर्तमान जन्म में जीवात्मा ने एक निश्चित आकार प्रकार संकल्पित कर जन्म ले लिया है तो कहा जा सकता है की अब उसमे कोई फेरबदल संभव नहीं. जो फेर बदल जैसा दिखाई दे रहा है वह उसी संकल्पना का ही हिस्सा है. इसे Divine Plan या दैवीय इच्छा भी कहा जाता है.
ज्योतिष भी इसी बात की पुष्टि करता है.
ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक का व्यक्तित्व, कल्पना, पराक्रम, आनंद, संघर्ष और प्राप्तियां भिन्न होते हैं.
और यह सब जन्म जन्मांतर तक फैली विस्तृत यात्रा की वह वर्तमान अभिव्यक्ति होते हैं जिन्हें जीवात्मा ने आकर्षण द्वारा आयोजित किया है…
ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक का व्यक्तित्व, कल्पना, पराक्रम, आनंद, संघर्ष और प्राप्तियां भिन्न होते हैं.
और यह सब जन्म जन्मांतर तक फैली विस्तृत यात्रा की वह वर्तमान अभिव्यक्ति होते हैं जिन्हें जीवात्मा ने आकर्षण द्वारा आयोजित किया है…

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