नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में एक पार्क है जिसका नाम है नेहरु पार्क. इस पार्क में बटुक भैरव का एक अति प्राचीन मंदिर है. इस मंदिर के सम्बन्ध में मान्यता है की ये मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित है. मंदिर की स्थापना के सन्दर्भ में एक बहुत ही रोचक कथा है.
पांडवों को जब इन्द्रप्रस्थ का राज्य मिला तो वे हस्तिनापुर से इन्द्रप्रस्थ ( दिल्ली ) आ गए. अपने नए राज्य और दुर्ग की सुरक्षा हेतु पांडवों ने आपस में मंत्रणा कर निश्चय किया की काशी के कोतवाल भैरव महाराज की शरण में जाया जाए और उनसे इन्द्रप्रस्थ निवास का आग्रह किया जाए. महाबली भीम को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी की किसी भी तरह अनुनय विनय करके वो भैरव महाराज को स्थाई रूप से निवास हेतु काशी से इन्द्रप्रस्थ लेकर आयें.
भीम काशी पहुंचे और भैरव महाराज से इन्द्रप्रस्थ की सुरक्षा हेतु निवेदन किया और साथ चलने का आग्रह करने लगे. लेकिन भैरव महाराज ने मना कर दिया. भीम द्वारा बहुत हाथ पैर जोड़ने पर भैरव महाराज मान गए और इन्द्रप्रस्थ चलने के लिए तैयार हो गए. परन्तु उन्होंने एक शर्त रख दी. भैरव महाराज भीम से बोले की मैं शिला रूप में तुम्हारे साथ चलूँगा और तुम्हें मुझे कंधे पर उठा कर ले जाना होगा. सम्पूर्ण यात्रा मार्ग में मेरा भूमि स्पर्श वर्जित होगा. यदि मार्ग में तुमने मुझे कंधे से उतारा तो मैं उसी स्थान पर स्थिर हो जाऊंगा. भीम ने शर्त स्वीकार कर ली.
भैरव महाराज शिला रूप में परिवर्तित हो गए और भीम ने उन्हें कंधे पर उठा लिया. धीरे धीरे सम्पूर्ण मार्ग निर्विघ्न तय हो गया और जब इन्द्रप्रस्थ दुर्ग मात्र आठ दस कोस दूर रह गया तो दैवयोग से भीम को भयानक प्यास ने आ घेरा. भीम प्यास से व्याकुल हो गए . उन्हें एक कुआं दिखाई दिया. भीम ने शिला को कंधे से उतार कर कुएं की मुंडेर पर रख दिया और कुएं से जल निकाल कर पीने लगे. प्यास बुझा कर भीम ने जब शिला को वापिस उठाना चाहा तो शिला टस से मस ना हुई. अब तो भीमसेन के छक्के छूट गए. भीम पछताते हुए बहुत रोये चिल्लाये तो भैरव महाराज प्रकट होकर बोले की मैं तो अब यहीं रहूँगा. तुम मेरी कुछ जटाएं दुर्ग में स्थापित कर देना इस प्रकार में वहां किलकारी भैरव रूप में स्थापित हो जाऊँगा. भीम को शिला के शीर्ष पर कुछ जटाएं दिखलाई पडीं. उसने वो जटाएं ली और भारी मन से दुर्ग की ओर प्रस्थान किया.
इसके उपरान्त पांडवों ने विधिपूर्वक दोनों मंदिरों की स्थापना की. नेहरु पार्क मंदिर में भैरव महाराज बटुक भैरव और पुराने किले मंदिर में किलकारी भैरव रूप में विराजमान हैं.
नेहरु पार्क मंदिर में बटुक भैरव कुएं के ऊपर स्थापित हैं. पौराणिक मान्यता है की कुएं पर स्थापित भैरव अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं. ये मंदिर अत्यंत जागृत और चमत्कारी मंदिर है. भक्त लोग भैरव महाराज को यहाँ उड़द की दाल के व्यंजन , ईमरती और मदिरा का भोग लगाते हैं...
पांडवों को जब इन्द्रप्रस्थ का राज्य मिला तो वे हस्तिनापुर से इन्द्रप्रस्थ ( दिल्ली ) आ गए. अपने नए राज्य और दुर्ग की सुरक्षा हेतु पांडवों ने आपस में मंत्रणा कर निश्चय किया की काशी के कोतवाल भैरव महाराज की शरण में जाया जाए और उनसे इन्द्रप्रस्थ निवास का आग्रह किया जाए. महाबली भीम को ये जिम्मेदारी सौंपी गयी की किसी भी तरह अनुनय विनय करके वो भैरव महाराज को स्थाई रूप से निवास हेतु काशी से इन्द्रप्रस्थ लेकर आयें.
भीम काशी पहुंचे और भैरव महाराज से इन्द्रप्रस्थ की सुरक्षा हेतु निवेदन किया और साथ चलने का आग्रह करने लगे. लेकिन भैरव महाराज ने मना कर दिया. भीम द्वारा बहुत हाथ पैर जोड़ने पर भैरव महाराज मान गए और इन्द्रप्रस्थ चलने के लिए तैयार हो गए. परन्तु उन्होंने एक शर्त रख दी. भैरव महाराज भीम से बोले की मैं शिला रूप में तुम्हारे साथ चलूँगा और तुम्हें मुझे कंधे पर उठा कर ले जाना होगा. सम्पूर्ण यात्रा मार्ग में मेरा भूमि स्पर्श वर्जित होगा. यदि मार्ग में तुमने मुझे कंधे से उतारा तो मैं उसी स्थान पर स्थिर हो जाऊंगा. भीम ने शर्त स्वीकार कर ली.
भैरव महाराज शिला रूप में परिवर्तित हो गए और भीम ने उन्हें कंधे पर उठा लिया. धीरे धीरे सम्पूर्ण मार्ग निर्विघ्न तय हो गया और जब इन्द्रप्रस्थ दुर्ग मात्र आठ दस कोस दूर रह गया तो दैवयोग से भीम को भयानक प्यास ने आ घेरा. भीम प्यास से व्याकुल हो गए . उन्हें एक कुआं दिखाई दिया. भीम ने शिला को कंधे से उतार कर कुएं की मुंडेर पर रख दिया और कुएं से जल निकाल कर पीने लगे. प्यास बुझा कर भीम ने जब शिला को वापिस उठाना चाहा तो शिला टस से मस ना हुई. अब तो भीमसेन के छक्के छूट गए. भीम पछताते हुए बहुत रोये चिल्लाये तो भैरव महाराज प्रकट होकर बोले की मैं तो अब यहीं रहूँगा. तुम मेरी कुछ जटाएं दुर्ग में स्थापित कर देना इस प्रकार में वहां किलकारी भैरव रूप में स्थापित हो जाऊँगा. भीम को शिला के शीर्ष पर कुछ जटाएं दिखलाई पडीं. उसने वो जटाएं ली और भारी मन से दुर्ग की ओर प्रस्थान किया.
इसके उपरान्त पांडवों ने विधिपूर्वक दोनों मंदिरों की स्थापना की. नेहरु पार्क मंदिर में भैरव महाराज बटुक भैरव और पुराने किले मंदिर में किलकारी भैरव रूप में विराजमान हैं.
नेहरु पार्क मंदिर में बटुक भैरव कुएं के ऊपर स्थापित हैं. पौराणिक मान्यता है की कुएं पर स्थापित भैरव अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं. ये मंदिर अत्यंत जागृत और चमत्कारी मंदिर है. भक्त लोग भैरव महाराज को यहाँ उड़द की दाल के व्यंजन , ईमरती और मदिरा का भोग लगाते हैं...

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