शुक्रवार, 10 जून 2016

स्थिति

अजर अमर अविनाशी
पंचतत्वी 
छकड़े पर
सवार है
कहीं पहुंचने को
बेक़रार है
कस्तूरी हिरण सा
बौराया फिरता है
भावनाओं के
समुन्दर में
डूबता
तिरता है
ये जरुर किसी
शाप को
ढो रहा है
वर्ना
मनुष्यता के
चौराहे पर खड़ा
क्यों रो रहा है...



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