अंतरजाल
मेरी कविताएं, कहानियां, संवाद और लेख...
शनिवार, 11 जून 2016
भाषा
एक भाषा
आधी अधूरी सी
पड़ोसन सी
बनी ठनी
मटक रही है
एक भाषा
अपनी सी
मां सी
उपेक्षित
दर दर
भटक रही है...
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