अवसर
आदमी चौराहा हैइससे हर तरफमार्ग जाता है
गिरने उठने
ठहरने चलने के
चुनाव द्वारा
खुद को कहीं भी
पहुंचाता है
इसके पास
विकल्प है
भटकाव की संभावना
अति अल्प है
यदि विवेक को
उंगली पकड़ाता है
आदमी परतंत्र है
परन्तु परतंत्रता में
स्वतंत्र है
प्रारब्ध की झील में
स्वेच्छा की नाव
चलाता है...
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