हिन्दू और बौद्ध मान्यताओं में शंभल एक पवित्र स्थान है.
विष्णु पुराण के अनुसार दशम अवतार शंभल में जन्म लेगा. ऐसे ही बौद्धों के एक ग्रंथ कालचक्र तंत्र में कहा गया है की शंभल में मैत्रेय नाम से बुद्ध का अवतार होगा जो मलेच्छों का नाश करेगा.
इसे एशिया में कहीं छिपा माना गया है लेकिन कहां किसी को नहीं पता. कोई इसे हिमालय में तो कोई चीन में स्थित मानता है. रूस से भारत आकर बस गये महान चित्रकार निकोलाई रोरिक शंभल को दुर्गम हिमालय क्षेत्रों में जीवन भर खोजते रहे पर असफल रहे.
कल्कि पुराण में दशम अवतार कल्कि की माता सुमति (सद्बुद्धि), पिता विष्णुयश (पालन तत्व) और जन्मस्थान शंभल (पवित्र भूमि) बताया गया है.
कल्कि की दो पत्नियां पद्मा (कमल विराजित) और रमा (संहारिणी शक्ति) हैं. कल्कि पुराणानुसार बाल्यवस्था में कल्कि का विवाह त्रिकुटा नामक कन्या से भी हुआ था लेकिन त्रिकुटा कभी कल्कि के साथ नहीं रहीं. पौराणिक मान्यता अनुसार माता वैष्णोदेवी ही त्रिकुटा हैं.
आश्चर्यजनक रूप से कल्कि अवतार के बारे में अनेक भविष्यवाणियां करने वाले त्रिकालज्ञ संत मावजी महाराज 'क्षेत्र साबला पुरी पाटन ग्राम' का उद्घोष करते हैं. यह साबला और कुछ नहीं शंभल का ही अपभ्रंश है.
ईसवी सन 745 में राजा वनराज चावड़ा ने पाटन की स्थापना की.
महाभारत काल में यह प्रदेश अनर्त कहलाता था जो की प्रसिद्द योद्धा सात्यकि और कृतवर्मा का घर था. यह दोनों योद्धा और अन्य अनर्त वीर पांडवों और कौरवों की तरफ से महाभारत युद्ध में लड़े थे. अनर्त गुजरात के काठियावाड़ का उत्तरी इलाका पाटन ही है.
प्राचीन पाटन का ह्रदय स्थल है वाडनगर जिसका इतिहास आज से 4500 वर्ष पीछे तक जाता है. इस स्थान की ऐतिहासिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की वर्तमान में यह शहर एक एक टीले नुमा संरचना पर बसा हुआ है जो की और कुछ नहीं एक के ऊपर एक बसी अनेक सभ्यताएं हैं.
वेदों में वर्णित महान ऋषि याज्ञवल्कय जो की शास्त्रार्थ में अजेय थे का घर चमत्कारपुर भी यही क्षेत्र है. बृहदारण्यक उपनिषद में ऋषि याज्ञवल्कय का विस्तार से वर्णन है.
सांतवीं सदी में चीन से भारत आये चीनी यात्री ह्युन्सांग का आनंदपुर भी वाडनगर ही है, आज इस बात के ठोस पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं.
हड़प्पा, सनातन, रोमन, बौद्ध, और जैन संस्कृति को स्वयं में समेटे अतीत में मंदिरों का शहर वाडनगर इतना पवित्र माना जाता था की धर्म, कला और संस्कृति के पिपासुओं के आकर्षण का केंद्र था...
विष्णु पुराण के अनुसार दशम अवतार शंभल में जन्म लेगा. ऐसे ही बौद्धों के एक ग्रंथ कालचक्र तंत्र में कहा गया है की शंभल में मैत्रेय नाम से बुद्ध का अवतार होगा जो मलेच्छों का नाश करेगा.
इसे एशिया में कहीं छिपा माना गया है लेकिन कहां किसी को नहीं पता. कोई इसे हिमालय में तो कोई चीन में स्थित मानता है. रूस से भारत आकर बस गये महान चित्रकार निकोलाई रोरिक शंभल को दुर्गम हिमालय क्षेत्रों में जीवन भर खोजते रहे पर असफल रहे.
कल्कि पुराण में दशम अवतार कल्कि की माता सुमति (सद्बुद्धि), पिता विष्णुयश (पालन तत्व) और जन्मस्थान शंभल (पवित्र भूमि) बताया गया है.
कल्कि की दो पत्नियां पद्मा (कमल विराजित) और रमा (संहारिणी शक्ति) हैं. कल्कि पुराणानुसार बाल्यवस्था में कल्कि का विवाह त्रिकुटा नामक कन्या से भी हुआ था लेकिन त्रिकुटा कभी कल्कि के साथ नहीं रहीं. पौराणिक मान्यता अनुसार माता वैष्णोदेवी ही त्रिकुटा हैं.
आश्चर्यजनक रूप से कल्कि अवतार के बारे में अनेक भविष्यवाणियां करने वाले त्रिकालज्ञ संत मावजी महाराज 'क्षेत्र साबला पुरी पाटन ग्राम' का उद्घोष करते हैं. यह साबला और कुछ नहीं शंभल का ही अपभ्रंश है.
ईसवी सन 745 में राजा वनराज चावड़ा ने पाटन की स्थापना की.
महाभारत काल में यह प्रदेश अनर्त कहलाता था जो की प्रसिद्द योद्धा सात्यकि और कृतवर्मा का घर था. यह दोनों योद्धा और अन्य अनर्त वीर पांडवों और कौरवों की तरफ से महाभारत युद्ध में लड़े थे. अनर्त गुजरात के काठियावाड़ का उत्तरी इलाका पाटन ही है.
प्राचीन पाटन का ह्रदय स्थल है वाडनगर जिसका इतिहास आज से 4500 वर्ष पीछे तक जाता है. इस स्थान की ऐतिहासिकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की वर्तमान में यह शहर एक एक टीले नुमा संरचना पर बसा हुआ है जो की और कुछ नहीं एक के ऊपर एक बसी अनेक सभ्यताएं हैं.
वेदों में वर्णित महान ऋषि याज्ञवल्कय जो की शास्त्रार्थ में अजेय थे का घर चमत्कारपुर भी यही क्षेत्र है. बृहदारण्यक उपनिषद में ऋषि याज्ञवल्कय का विस्तार से वर्णन है.
सांतवीं सदी में चीन से भारत आये चीनी यात्री ह्युन्सांग का आनंदपुर भी वाडनगर ही है, आज इस बात के ठोस पुरातात्विक साक्ष्य मौजूद हैं.
हड़प्पा, सनातन, रोमन, बौद्ध, और जैन संस्कृति को स्वयं में समेटे अतीत में मंदिरों का शहर वाडनगर इतना पवित्र माना जाता था की धर्म, कला और संस्कृति के पिपासुओं के आकर्षण का केंद्र था...

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