भूख बहुत उदार है
इसे देश और जनता से
बड़ा प्यार है
ये समाजसेवा के
जल में नहाती है
फिर निर्मल हुई देह को
राजनीति के चोले से
सजाती है
भूख खाने में कोई
नखरा नहीं करती
जनहित में बेचारी
पशु चारे से लेकर
बैसाखी तक
क्या नहीं चरती
सत्ता में आते ही
भूख को तो मानो
पंख लग जाते हैं
सड़क नहर बांध
परियोजना और खदान
सभी इसके हाथों
सदगति पाते हैं
भूख विकास के
मायाजाल में भी
नहीं फंसती
क्योंकि माटी में जन्मी देह
माटी से जुडी रहे
यही तो है सबसे बड़ी
राष्ट्रभक्ति...
इसे देश और जनता से
बड़ा प्यार है
ये समाजसेवा के
जल में नहाती है
फिर निर्मल हुई देह को
राजनीति के चोले से
सजाती है
भूख खाने में कोई
नखरा नहीं करती
जनहित में बेचारी
पशु चारे से लेकर
बैसाखी तक
क्या नहीं चरती
सत्ता में आते ही
भूख को तो मानो
पंख लग जाते हैं
सड़क नहर बांध
परियोजना और खदान
सभी इसके हाथों
सदगति पाते हैं
भूख विकास के
मायाजाल में भी
नहीं फंसती
क्योंकि माटी में जन्मी देह
माटी से जुडी रहे
यही तो है सबसे बड़ी
राष्ट्रभक्ति...

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