समय की सांप सीढ़ियों पर
हांफते कांपते
दिशाहीनता के धूंए से
अटी सड़कों को नापते
अदन के बाग़ से बेदखल
वो भटक रहा है
और संसार रोज नई
मांगो से आहत करता
उसके कंधे पर
बेताल सा लटक रहा है
लालसा ने जिन्दगी को
किस तरह मोड़ा है
परित्यक्त फल के लोभ ने
कहां लाके छोड़ा है
चौराहे पर दिग्भ्रमित सा
अतीत को झटक रहा है
वर्तमान की लाश पर
भविष्य को बोया था
बिना आधार के ही
महल संजोया था
आज मलबे का ढेर
शूल सा खटक रहा है...
हांफते कांपते
दिशाहीनता के धूंए से
अटी सड़कों को नापते
अदन के बाग़ से बेदखल
वो भटक रहा है
और संसार रोज नई
मांगो से आहत करता
उसके कंधे पर
बेताल सा लटक रहा है
लालसा ने जिन्दगी को
किस तरह मोड़ा है
परित्यक्त फल के लोभ ने
कहां लाके छोड़ा है
चौराहे पर दिग्भ्रमित सा
अतीत को झटक रहा है
वर्तमान की लाश पर
भविष्य को बोया था
बिना आधार के ही
महल संजोया था
आज मलबे का ढेर
शूल सा खटक रहा है...

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