कुछ लोग बहुत तेज मिर्च खाते हैं.
कम मिर्च वाला भोजन उन्हें अस्पताल के खाने जैसा लगता है. उनका आग्रह होता है की व्यंजन चाहे जो भी हो तीखा होना चाहिए. उन्हें तीखे और चरपरेपन में ही रस है.
कम मिर्च वाला भोजन उन्हें अस्पताल के खाने जैसा लगता है. उनका आग्रह होता है की व्यंजन चाहे जो भी हो तीखा होना चाहिए. उन्हें तीखे और चरपरेपन में ही रस है.
ऐसे लोग मिर्च के लती कहलाते हैं. इन्हें मिर्च खाने का नशा सा सवार रहता है.
अमेरिकन फार्मासिस्ट विल्बर स्कोविल ने सर्वप्रथम मिर्च के चरपरेपन को नापने की इकाई अविष्कृत की.
इसे उनके ही नाम स्कोविल से जाना जाता है.
इसे उनके ही नाम स्कोविल से जाना जाता है.
शिमला मिर्च को जीरो स्कोविल माना जाता है. जबकि एक तीखी भारतीय मिर्च लोटा मिर्च या ततैय्या मिर्च 75000 स्कोविल मानी जाती है. इसे खाने के बाद जलन मिटाने के लिए एक लोटा पानी पीना पड़ता है. लेकिन मिर्च प्रेमी इसके दीवाने हैं.
कहा जाता है की विश्व की सर्वाधिक तीखी मिर्चों में से एक तीखी मिर्च मेक्सिको की हबानेरो है. यह 300000 स्कोविल आंकी जाती है. इसे खाने के बाद सिर चकरा जाता है और काफी देर तक कानो में बहरापन बना रहता है.
लेकिन तीखेपन में ये मिर्च उत्तर पूर्व भारत में पाई जाने वाली भूत जोलोकिया मिर्च के सामने बच्चा है.
भूत जोलोकिया विश्व की सर्वाधिक चरपरी और खतरनाक मिर्च है. इसे 1000000 स्कोविल तक आंका गया है. यह मिर्च इतनी तीखी है की इसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता.
कहा जाता है की एक हजार लोगों के लिए बने व्यंजन में चरपनेपन के लिए इस एक मिर्च को डालना काफी रहता है.
यदि कोई जोश में आकर इसका छोटा सा भी अंश खा लेता है तो उसकी हालत अस्पताल जाने जैसी हो जाती है.
मिर्च में कैप्सैसिन नामक रसायन होता है.
जब ये रसायन शरीर में जाता है तो शरीर का सचेतक तंत्र तुरंत मस्तिष्क को अत्यधिक जलन की खतरे की सूचना भेजता है. मस्तिष्क यह सूचना पाते ही एंडोर्फिन नामक जलन शामक तत्व का रिसाव शरीर में कर देता है.
एंडोर्फिन का रिसाव होते ही मनो मस्तिष्क में एक आह्लाद, खुमारी, प्रसन्नता और विश्राम का एहसास होता है.
यह बिलकुल ऐसा है जैसे थोड़ी सी अफीम या गांजे की मात्रा खा ली जाए.
जब ये रसायन शरीर में जाता है तो शरीर का सचेतक तंत्र तुरंत मस्तिष्क को अत्यधिक जलन की खतरे की सूचना भेजता है. मस्तिष्क यह सूचना पाते ही एंडोर्फिन नामक जलन शामक तत्व का रिसाव शरीर में कर देता है.
एंडोर्फिन का रिसाव होते ही मनो मस्तिष्क में एक आह्लाद, खुमारी, प्रसन्नता और विश्राम का एहसास होता है.
यह बिलकुल ऐसा है जैसे थोड़ी सी अफीम या गांजे की मात्रा खा ली जाए.
यही है मिर्च का नशा…

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