सर्दियां शुरू होते ही भारतीय घरों में च्यवनप्राश का सेवन किया जाना आम बात है.
शायद ही कोई ऐसा घर होगा जो टॉनिक के तौर पर च्यवनप्राश का सेवन ना करता हो.
च्यवनप्राश 54 प्रकार की जड़ी बूटियों से मिलकर बनने वाला फ़ॉर्मूला है.
इसमें अष्टवर्ग समूह की आठ हिमालयी जड़ी बूटियां जैसे की रिद्धि, वृद्धि, जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली और क्षीरकाकोली आधारभूत अतिआवश्यक घटक तत्व की भूमिका निभाती हैं.
लेकिन दुर्भाग्यवश अत्यधिक पर्वतीय दोहन और अनियंत्रित विकास की प्रक्रिया स्वरूप ये जड़ी बूटियां वर्षों पहले लुप्त हो चुकी हैं. यही नहीं बल्कि च्यवनप्राश में पड़ने वाली अन्य चौबीस प्रकार की जड़ी बूटियां भी लुप्तप्राय हैं.
ऐसे में कहा जा सकता है की च्यवनप्राश फ़ॉर्मूले की बरसों पहले मौत हो चुकी है.
लेकिन आज भी बाजार में च्यवनप्राश बिक रहा है...
शायद ही कोई ऐसा घर होगा जो टॉनिक के तौर पर च्यवनप्राश का सेवन ना करता हो.
च्यवनप्राश 54 प्रकार की जड़ी बूटियों से मिलकर बनने वाला फ़ॉर्मूला है.
इसमें अष्टवर्ग समूह की आठ हिमालयी जड़ी बूटियां जैसे की रिद्धि, वृद्धि, जीवक, ऋषभक, मेदा, महामेदा, काकोली और क्षीरकाकोली आधारभूत अतिआवश्यक घटक तत्व की भूमिका निभाती हैं.
लेकिन दुर्भाग्यवश अत्यधिक पर्वतीय दोहन और अनियंत्रित विकास की प्रक्रिया स्वरूप ये जड़ी बूटियां वर्षों पहले लुप्त हो चुकी हैं. यही नहीं बल्कि च्यवनप्राश में पड़ने वाली अन्य चौबीस प्रकार की जड़ी बूटियां भी लुप्तप्राय हैं.
ऐसे में कहा जा सकता है की च्यवनप्राश फ़ॉर्मूले की बरसों पहले मौत हो चुकी है.
लेकिन आज भी बाजार में च्यवनप्राश बिक रहा है...

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