बुधवार, 8 जून 2016

एक दुकानदार का अपने गुरूजी से संवाद

'बाबा जी'…
"बोलो बच्चा" …
'बाबा जी मुझे लगता है मेरा दिमाग कमजोर हो गया है. ऐसा महसूस होता है जैसे मैं कुछ चूक रहा हूं. याददाश्त भी कम हो गई है'…
"हम्म्म… बच्चा दुकान जाते हो"…
'जी बाबा जी… जाता हूं. कपड़े वाली दुकान की जिम्मेवारी मेरी है. भाई दूसरे काम देखते हैं'… 
"बच्चा घर से दुकान और दुकान से घर ठीक ठाक पहुंच जाते हो…रस्ता तो नहीं भूलते"…
'नहीं बाबा जी…नहीं भूलता…पहुंच जाता हूं'…
"ग्राहकों से निपट लेते हो"…
'जी बाबा जी…दुकान पर लड़के रखे हुए हैं. वो माल दिखाते हैं मैं लेनदेन कर लेता हूं'…
"हम्म्म…व्यापारियों से व्यवहार में कोई दिक्कत"…
'नहीं बाबा जी…सब पुराने लोग हैं'…
"घर परिवार के लोगों को पहचान लेते हो"…
'जी बाबा जी…पहचान लेता हूं'…
"अबे झोंपड़ी के सब कुछ तो चौकस है. इससे ज्यादा दिमाग लेकर क्या रॉकेट का इंजन बनायेगा"…

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