शुक्रवार, 10 जून 2016

ताड़पत्रों पर लिखा भविष्य

नाड़ी ताड़पत्र फलादेश अपने आप में एक अत्यंत रहस्मय प्राचीन भारतीय विधा है. 
इसमें अगस्त्य, कौशिक, काक भुजंदर, अत्री, नंदी आदि अनेक ऋषियों द्वारा मानव मात्र के लिए किया गया भविष्य फलादेश निहित है.

नाड़ी ताड़पत्र फलादेश ज्योतिष नहीं है. 
यद्यपि इसमें जातक की दशाओं और गोचर का विवरण मिलता है जो केवल प्रासंगिक है. 

यह दिव्य वाक्य है जो की भगवान् शिव और मां पार्वती के मध्य हुआ जातक संबंधी वार्तालाप है.
मां पार्वती भगवान् शिव से जातक संबंधी प्रश्न पूछती हैं और भगवान् उसका जवाब देते हैं.
इस वार्तालाप में जातक के संबंध में इतनी विशद जानकारी उपलब्द्ध होती है की वो वर्तमान जन्म का अतिक्रमण कर जाती है.
भगवान् द्वारा व्यक्ति की समस्या उसके कारण और परिहार के बारे में विस्तृत रूप से बताया जाता है.

दक्षिण का वैतीस्वरण कोईल इस विधा का गढ़ है. हालांकि देश के सभी प्रमुख नगरों में इनके केंद्र हैं.
दैवयोग से मुझे इस विधा का अच्छा खासा अनुभव प्राप्त हुआ है और मैं इसके प्रति नतमस्तक हूं.

(जैसा की जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आज नक्कालों का अस्तित्व है वैसे ही ये विधा भी ठगों की भेंट चढ़ चुकी है. कृपया सावधानी रखें)



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