शनिवार, 11 जून 2016

जिम कॉर्बेट

जिम कॉर्बेट का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं. 
इनके नाम पर उत्तराखंड राज्य में एक विशाल नैशनल पार्क भी स्थित है.

जिम कॉर्बेट को पढना एक रोमांचक अनुभव है. वो एक महान शिकारी और जंगलविद थे. 
दिलचस्प बात यह है की उन्हें पढ़ते वक्त उनकी छवि एक शिकारी के बजाय संत की उभरती है. 

जिम कॉर्बेट ने अनेक पुस्तकों में अपने संस्मरणों को लिखा है. इनमे 'कुमाउं के नरभक्षी', 'रुद्रप्रयाग का आदमखोर', 'जंगल लोर', 'मेरा भारत' आदि प्रमुख हैं.

जिम कॉर्बेट की लेखन शैली इतनी गजब की है की पढने वाला स्वयं को घटनास्थल पर मौजूद पाता है. भारत के जंगलों, गांवों और गांववासियों का ऐसा सजीव चित्रण मिलता है की पढना सार्थक हो जाता है.

'मेरा भारत' में जिम कॉर्बेट खूंखार सुल्ताना डाकू को पकड़ने की तत्कालीन सरकार की मुहिम का अद्भुत वर्णन करते हैं. 

इस वर्णन में सुल्ताना डाकू का चरित्र मार्मिक हो जाता है और उसके प्रति सहानुभूति होने लगती है.

सुल्ताना डाकू के हथियार आज भी नैनीताल के राजभवन में प्रदर्शित हैं और इन्हें देखने का सौभाग्य मुझे कुछ समय पूर्व प्राप्त हुआ था...



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