महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार पांडवों को विजय के लिए नरबली की आवश्यकता पड़ी. लेकिन स्वयं की बलि देने के लिए कोई भी प्रस्तुत नहीं हुआ.
संकट की इस घड़ी में अर्जुन की नाग पत्नी उलूपी का पुत्र इरावान स्वयं की बलि के लिए आगे आया.
लेकिन इरावान की एक शर्त थी की वो विवाहित मरना चाहता था.
जिसे कल मर जाना है उससे कौन शादी करेगा. फलस्वरूप कोई कन्या उससे विवाह के लिए तैयार नहीं हुई.
ऐसे में भगवान् श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप बनाया और इरावान से विवाह कर उसके साथ रात बिताई.
भारत का हिजड़ा समुदाय इसी कथा को आत्मसात कर श्री कृष्ण के योनि संयोजन में स्वयं को देखता है और इरावान को अपना देवता और पति मानता है.
तमिलनाडु के वेल्लुपुरम जिले के कूवगम गांव में इरावान देवता का मंदिर है.
हर साल तमिल वर्ष की पहली पूर्णिमा को इस मंदिर में 18 दिवसीय कार्यक्रम मनाया जाता है. इसमें हजारों हिजड़ों द्वारा उनके देवता इरावान से विवाह किया जाता है. लेकिन अगले दिन ही मंगलसूत्र तोड़ और महाविलाप के बीच इरावान की प्रतिमा को भग्न कर हिजड़ों द्वारा विधवा वेश धारण कर लिया जाता है.
इरावान को अरावन भी कहते हैं. समस्त हिजड़े स्वयं को उसकी विधवा मानते हैं...
संकट की इस घड़ी में अर्जुन की नाग पत्नी उलूपी का पुत्र इरावान स्वयं की बलि के लिए आगे आया.
लेकिन इरावान की एक शर्त थी की वो विवाहित मरना चाहता था.
जिसे कल मर जाना है उससे कौन शादी करेगा. फलस्वरूप कोई कन्या उससे विवाह के लिए तैयार नहीं हुई.
ऐसे में भगवान् श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप बनाया और इरावान से विवाह कर उसके साथ रात बिताई.
भारत का हिजड़ा समुदाय इसी कथा को आत्मसात कर श्री कृष्ण के योनि संयोजन में स्वयं को देखता है और इरावान को अपना देवता और पति मानता है.
तमिलनाडु के वेल्लुपुरम जिले के कूवगम गांव में इरावान देवता का मंदिर है.
हर साल तमिल वर्ष की पहली पूर्णिमा को इस मंदिर में 18 दिवसीय कार्यक्रम मनाया जाता है. इसमें हजारों हिजड़ों द्वारा उनके देवता इरावान से विवाह किया जाता है. लेकिन अगले दिन ही मंगलसूत्र तोड़ और महाविलाप के बीच इरावान की प्रतिमा को भग्न कर हिजड़ों द्वारा विधवा वेश धारण कर लिया जाता है.
इरावान को अरावन भी कहते हैं. समस्त हिजड़े स्वयं को उसकी विधवा मानते हैं...

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